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Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos and More From Dainik Bhaskar


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2 घंटे पहले

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पीएम मोदी गुरुवार सुबह ‘सेवा यात्रा’ के प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे। यह मोटरसाइकिल रैली गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक जा रही है। यात्रा में शामिल बाइक सवार शहरों, जिलों और गांवों से गुजरते हुए स्थानीय लोगों से मिल रहे हैं और जरूरत के मुताबिक सेवा गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान यात्रा में शामिल 10 बाइक ग्रुप मौजूद रहेंगे। यह यात्रा सेवा, संपर्क, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक कल्याण, सांस्कृतिक जुड़ाव और समुदाय को जोड़ने जैसे पहलुओं को एक जगह ला रही है।

दो बाइक रैलियों को 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर रवाना किया गया था। एक रैली उनके जन्मस्थान वडनगर से वाराणसी और दूसरी वाराणसी से वडनगर के लिए निकली है। दोनों यात्राएं 7 अक्टूबर को पूरी होंगी। ये रैलियां मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को चिह्नित करने के लिए निकाली जा रही हैं।

SIR के बाद अरुणाचल कांग्रेस ने मांगी जांच, हर नाम हटाने का आधार सार्वजनिक करने की मांग

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस ने SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए विधानसभा क्षेत्रवार जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या पिछली सूची के मुकाबले 21% से ज्यादा घट गई है। कांग्रेस ने हर नाम हटाए जाने का कानूनी और सत्यापन योग्य आधार सुनिश्चित करने को कहा है।

अरुणाचल प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी हुई। इसमें 6.96 लाख मतदाता हैं। यह SIR से पहले की संख्या से 1.91 लाख कम है। अंतिम सूची में 3,43,709 पुरुष, 3,52,315 महिलाएं और दो थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने कहा कि इतनी बड़ी कमी को देखते हुए चुनाव अधिकारियों को विधानसभा क्षेत्रवार और श्रेणीवार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। पार्टी ने नाम जोड़ने और हटाने की संख्या के साथ, गोपनीयता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, नाम हटाने के व्यापक कारण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

कांग्रेस ने कहा कि हर नाम हटाने का कानूनी और सत्यापन योग्य आधार होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रशासनिक गलतियों या दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में आने वाली दिक्कतों के कारण कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।



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32 मिनट पहले

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पीएम मोदी गुरुवार सुबह ‘सेवा यात्रा’ के प्रतिभागियों से बातचीत करेंगे। यह मोटरसाइकिल रैली गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक जा रही है। यात्रा में शामिल बाइक सवार शहरों, जिलों और गांवों से गुजरते हुए स्थानीय लोगों से मिल रहे हैं और जरूरत के मुताबिक सेवा गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान यात्रा में शामिल 10 बाइक ग्रुप मौजूद रहेंगे। यह यात्रा सेवा, संपर्क, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक कल्याण, सांस्कृतिक जुड़ाव और समुदाय को जोड़ने जैसे पहलुओं को एक जगह ला रही है।

दो बाइक रैलियों को 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर रवाना किया गया था। एक रैली उनके जन्मस्थान वडनगर से वाराणसी और दूसरी वाराणसी से वडनगर के लिए निकली है। दोनों यात्राएं 7 अक्टूबर को पूरी होंगी। ये रैलियां मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को चिह्नित करने के लिए निकाली जा रही हैं।

SIR के बाद अरुणाचल कांग्रेस ने मांगी जांच, हर नाम हटाने का आधार सार्वजनिक करने की मांग

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस ने SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए विधानसभा क्षेत्रवार जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या पिछली सूची के मुकाबले 21% से ज्यादा घट गई है। कांग्रेस ने हर नाम हटाए जाने का कानूनी और सत्यापन योग्य आधार सुनिश्चित करने को कहा है।

अरुणाचल प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी हुई। इसमें 6.96 लाख मतदाता हैं। यह SIR से पहले की संख्या से 1.91 लाख कम है। अंतिम सूची में 3,43,709 पुरुष, 3,52,315 महिलाएं और दो थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने कहा कि इतनी बड़ी कमी को देखते हुए चुनाव अधिकारियों को विधानसभा क्षेत्रवार और श्रेणीवार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। पार्टी ने नाम जोड़ने और हटाने की संख्या के साथ, गोपनीयता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, नाम हटाने के व्यापक कारण भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

कांग्रेस ने कहा कि हर नाम हटाने का कानूनी और सत्यापन योग्य आधार होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रशासनिक गलतियों या दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में आने वाली दिक्कतों के कारण कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।



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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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दिल्ली के वजीराबाद इलाके के एक होटल में नाबालिग से रेप का मामला सामने आया है। आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए उससे दोस्ती की थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी और नाबालिग दोनों वजीराबाद इलाके के रहने वाले हैं। आरोपी ने दोस्ती का झांसा देकर मंगलवार को नाबालिग को होटल में बुलाया था।

घटना के बाद नाबालिग घर लौटी और परिवार को पूरी बात बताई। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने POCSO एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है।

परिवार के पुलिस से संपर्क करने के बाद नाबालिग का मेडिकल कराया गया। पुलिस ने उसका बयान भी दर्ज किया।

बयान और मेडिकल जांच के आधार पर वजीराबाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। घटना के बाद से आरोपी फरार है।

होटल के रिकॉर्ड की जांच

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नाबालिग को होटल में प्रवेश कैसे मिला। जांचकर्ता होटल का रजिस्टर, CCTV फुटेज और अन्य रिकॉर्ड देख रहे हैं।

दिल्ली में रेप के पिछले 3 केस

12 सितंबर: स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप-हत्या। अगले दिन खेत के पास खुले मैदान में शव मिला। चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें तीन नाबालिग हैं।

16 सितंबर: सदर बाजार के दुकान में 10 साल की बच्ची से रेप। बच्ची स्टेशनरी खरीदने के लिए घर से निकली थी। आरोपी दुकानदार को गिरफ्तार किया गया।

21 सितंबर: दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग से गैंगरेप का मामला सामने आया।

दिल्ली में हर दिन बच्चों से यौन अपराध के 4 मामले

NCRB के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 केस दर्ज हुए। यानी औसतन हर दिन 4 से ज्यादा मामले सामने आए। 2025 की रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।

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दिल्ली में बस में 16 साल की छात्रा से गैंगरेप:ग्रेटर नोएडा से बैठाया; बस 47km दौड़ती रही, शीशे पर पर्दे लगे थे, ड्राइवर-कंडक्टर अरेस्ट

दिल्ली में 16 साल की छात्रा से चलती स्लीपर बस में गैंगरेप का मामला सामने आया है। घटना 4 अगस्त की है, पुलिस ने 31 अगस्त को इसकी जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक पीड़ित ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर बस में बैठी। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर छोड़ा। इस दौरान बस करीब 47 किमी दौड़ती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे थे। पूरी खबर पढ़ें



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2 घंटे पहले

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केंद्र सरकार ने खाने के तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटा दी है। इससे देश में खाना पकाने का तेल सस्ता हो सकता है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नई दरें 24 सितंबर से लागू होंगी। सरकार ने क्रूड सोया और क्रूड पाम ऑयल पर शुल्क 10% से घटाकर 5% कर दिया है।

रिफाइंड सोया और रिफाइंड पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई है। क्रूड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10% से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

रिफाइंड ऑयल पर भी शुल्क घटा

रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर कस्टम ड्यूटी 32.5% से घटाकर 22.5% कर दी गई है।

इन कटौतियों से खाद्य तेलों की आयात लागत कम होने की उम्मीद है। इससे ग्राहकों को कीमतों में राहत मिल सकती है।

हालांकि, ग्राहकों को मिलने वाली राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि सप्लाई चेन में ड्यूटी कटौती का फायदा किस तरह आगे पहुंचाया जाता है।

भारत में पाम, सरसो और मूंगफली के तेल का इस्तेमाल

पाम तेल: यह सबसे सस्ता होता है, इसलिए बाहर के खाने, नमकीन, बिस्कुट और ढाबों में सबसे ज्यादा यही इस्तेमाल होता है।

सोयाबीन तेल: यह हल्का और सस्ता होने के कारण, भारतीय घरों की रसोई में रोज़ाना के खाना पकाने के लिए सबसे लोकप्रिय है।

सरसों का तेल: उत्तर और पूर्वी भारत की पहली पसंद, जो अपने तीखे स्वाद और स्वास्थ्य गुणों के कारण जाना जाता है।

सूरजमुखी का तेल: यह पचने में हल्का माना जाता है, इसलिए शहरी घरों में सेहत के प्रति जागरूक लोग इसका खूब इस्तेमाल करते हैं।

मूंगफली का तेल: गुजरात और दक्षिण भारत में मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाला यह तेल पकौड़े या डीप-फ्राइंग जैसी चीज़ों के लिए बेहतरीन है।



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लातूर26 मिनट पहले

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पेपर लीक मामले में आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक के बेटे पर NTA ने NEET-UG परीक्षा देने से दो साल के लिए बैन लगा दिया है।

कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर का बेटा आदित्य NEET-UG 2027 भी नहीं दे सकेगा।

NTA ने 21 जून को NEET-UG की दोबारा परीक्षा कराई थी। इसके बाद आदित्य का रिजल्ट रोककर उससे कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा गया था।

आदित्य ने अपने जवाब में परीक्षा के दौरान किसी भी गलत तरीके का इस्तेमाल करने से इनकार किया। उसने कहा कि नोटिस 3 मई की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है।

आदित्य ने यह भी सवाल उठाया कि इसके बावजूद 21 जून को हुई दोबारा परीक्षा का रिजल्ट क्यों रोका गया।

CBI का आरोप-केमिस्ट्री पेपर के लिए 5 लाख दिए

NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI ने शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया था। CBI के मुताबिक, उसने परीक्षा के केमिस्ट्री के सवाल हासिल करने के लिए पीवी कुलकर्णी को कथित तौर पर 5 लाख रुपए दिए थे।

P V कुलकर्णी परीक्षा के सवाल तैयार करने वाली NTA की टीम में शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि शिवराज का बेटा आदित्य, कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में जाता था।

शिवराज मोटेगांवकर फिलहाल जेल में है।

NEET-UG परीक्षा और दोबारा टेस्ट

नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट), यानी NEET-UG, मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए NTA कराता है।

पेपर लीक के आरोपों के बीच NTA ने 12 मई को 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई।

CBI ने पिछले महीने दिल्ली की नामित फास्ट-ट्रैक कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। यह कोर्ट पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में दूसरे गलत तरीकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करती है।

NEET पेपर लीक में 13 गिरफ्तार, 21 जून को री-टेस्ट हुआ

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।

12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 21 जून को नीट की परीक्षा दोबारा हुई थी। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

2024 में बनी थी राधाकृष्णन कमेटी, 101 सिफारिशें दी थीं

केंद्र सरकार ने 22 जून 2024 को पूर्व इसरो चीफ के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। कमेटी ने NTA के एग्जाम में जरूरी सुधार, पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों पर 101 सिफारिशें की थीं।

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पेपर लीक रोकने के क्या इंतजाम हुए, सुप्रीम कोर्ट जांचेगा:जज NTA दफ्तर जाएंगे, एजेंसी ने कहा था- एग्जाम सिस्टम फूलप्रूफ बनाया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं। पढ़ें पूरी खबर…

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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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वोटर्स लिस्ट के के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर रिपोर्ट पर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है। आयोग ने X पर प्रेस रिलीज में कहा कि कई सदस्यों वाले संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है।

आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से हुए हैं। वहीं, BJP ने भी कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय और होना सच्चे लोकतंत्र की निशानी है।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा से मुद्दे शामिल थे।

14 आपत्तियों पर EC ने कहा- ये आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा

रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है। दोनों आयुक्तों ने कथित तौर पर कुछ फैसले अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी होने पर सवाल उठाए थे।

EC ने कहा कि ड्राफ्ट स्तर पर आयोग के सदस्यों की ओर से उठाए गए सवाल, तकनीकी सुझाव और टिप्पणियां सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, इनका उद्देश्य पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।

Form-6 में बदलाव पर क्या था विवाद?

रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ी गई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि विवेक जोशी ने नियमों में बदलाव किए बिना Form-6 बदलने पर सवाल उठाया था। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने बदलाव को “अनधिकृत और गैरकानूनी” बताया था।

EC की प्रेस रिलीज में Form-6 का सीधे जिक्र नहीं किया गया। हालांकि आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और फैसले कानून और तय प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं और अंतिम फैसले पूरी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए।

वोटर डेटा के केंद्रीकरण पर भी सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने चुनावी रोल के डेटाबेस तक पहुंच को लेकर भी चिंता जताई थी। उनका सवाल था कि क्या राज्यों के स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की पहुंच धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत की जा रही है।

EC ने इसके जवाब में कहा कि उसके ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल लागू हैं। आयोग ने कहा कि ERO और DEO जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने का काम करते हैं।

वोटर जोड़ने-हटाने और पश्चिम बंगाल के मामलों पर भी आपत्ति

रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया से भी जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए नामों से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। संधू ने कथित तौर पर पूछा था कि इन अपीलों को दाखिल करने की मंजूरी किसने दी थी।

EC ने अपनी प्रेस रिलीज में इन मामलों का अलग-अलग जवाब नहीं दिया। आयोग ने सामान्य तौर पर कहा कि वोटर रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम ERO और DEO जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत करते हैं।

गोवा में 97 वोटरों का मामला

रिपोर्ट में गोवा का एक मामला भी सामने आया, जहां सत्यापित 97 पात्र मतदाताओं के नाम सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ पाए थे। यह मामला वोटर डेटा के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंताओं के उदाहरण के तौर पर बताया गया।

EC की प्रेस रिलीज में गोवा के इन 97 मतदाताओं के मामले पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

EC बोला- 40 नई पहल और कई चुनावी सुधार किए

चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में उसने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल शुरू कीं। इनमें देशभर में मतदाता सूची के रिवीजन और SIR समेत कई चुनावी सुधार शामिल हैं।

आयोग ने कहा कि इन सभी फैसलों को पूरी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली। EC ने यह भी कहा कि इस अवधि में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और चुनाव से जुड़े कई काम कराए गए।

BJP बोली- अलग राय लोकतंत्र का हिस्सा

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग राय सामने आने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के सदस्य आपस में विचार-विमर्श और अपनी राय साझा नहीं करेंगे तो विपक्ष उन पर सरकार की हां में हां मिलाने का आरोप लगाएगा।

विपक्ष ने CEC को हटाने की मांग की

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने विवाद को ‘ज्ञानेशगेट’ नाम दिया। राहुल गांधी ने BJP, RSS और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया।

TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने CEC को हटाने की मांग करते हुए SIR से पहले वाली वोटर लिस्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने भी CEC की गिरफ्तारी की मांग की। ये सभी राजनीतिक दलों के आरोप और मांगें हैं।

कानून में क्या प्रावधान है?

CEC और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के मुताबिक, आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। अगर CEC और अन्य चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर अलग राय रखते हैं, तो मामला बहुमत की राय के आधार पर तय किया जाता है।

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कोलकाता7 मिनट पहले

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भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ सीएम शुभेंदु के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की 6 मई को हत्या कर दी गई थी। - Dainik Bhaskar

भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ सीएम शुभेंदु के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की 6 मई को हत्या कर दी गई थी।

बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव से पहले एक और विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने BJP प्रत्याशी हसीरानी रथ के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कांग्रेस का दावा है कि BJP प्रत्याशी ने चुनावी हलफनामे में अपनी उम्र और पढ़ाई से जुड़ी गलत जानकारी दी है।

कांग्रेस नेता और वकील रित्जू घोषाल ने कोर्ट में कहा-

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हसीरानी रथ ने हलफनामे में जन्म साल 1966 बताया है, जबकि 1965 में माध्यमिक यानी 10वीं की परीक्षा पास करने का जिक्र किया है। हसीरानी ने जन्म से पहले 10वीं कैसे पास कर ली।

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नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। हसीरानी रथ की उम्मीदवारी की घोषणा 15 सितंबर को की गई थी। वह CM शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की मां हैं। 4 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आने के दो दिन बाद चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

स्कूल की मान्यता पर भी सवाल, दावा- सिर्फ 5वीं तक था दर्जा

भाजपा प्रत्याशी ने जिस स्कूल का नाम हलफनामे में दिया गया है, कांग्रेस ने उसके रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुताबिक, चौखाली गंगा पद्म मिलन कन्या विद्यापीठ की शुरुआत 1963 में हुई थी।उस समय वहां 5वीं तक पढ़ाई होती थी।

कांग्रेस के मुताबिक, स्कूल को 10वीं तक पढ़ाने की सरकारी मंजूरी 1973 में मिली थी। रित्जू घोषाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने हलफनामे की जांच की थी, लेकिन गड़बड़ी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

कांग्रेस ने कहा कि अगर भाजपा प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाती है तो उनकी उम्मीदवारी रद्द की जाए। कांग्रेस की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा।

भाजपा बोली- हलफनामे में सिर्फ टाइपिंग की गलती

वहीं BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। पार्टी ने कहा कि हसीरानी की उम्र को लेकर कोई समस्या नहीं है। BJP के मुताबिक, हसीरानी ने 1980 में 10वीं कक्षा में पढ़ाई की थी। पार्टी ने कहा कि हलफनामे में सिर्फ एक टाइपिंग की गलती हुई है।

हसीरानी के नंदीग्राम स्थित ऑफिस ने कहा कि उनका जन्म 1965 में हुआ था और उन्होंने 1980 में 10वीं की पढ़ाई की थी। उन्होंने उस समय बंगाल में लागू माध्यमिक परीक्षा व्यवस्था के तहत मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।

अब आगे क्या हो सकता है? 1. हाईकोर्ट BJP प्रत्याशी से जवाब मांग सकता है: हसीरानी रथ की ओर से दस्तावेजों के जरिए बताया जा सकता है कि 1965 और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी कैसे दर्ज हुई। 2. मूल दस्तावेज जांचे जा सकते हैं: जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, परीक्षा/सर्टिफिकेट और नामांकन देखे जाएंगे। खासकर यह जांचना होगा कि 1965 वास्तव में 10वीं पास करने का साल है या हलफनामे में गलत दर्ज हुआ है। 3. चुनाव आयोग का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा: कांग्रेस का कहना है कि आयोग ने हलफनामा जांचने के बावजूद इस विसंगति पर कार्रवाई नहीं की। इसलिए हाईकोर्ट आयोग से भी जवाब मांग सकता है। 4. अगर जानकारी गलत साबित होती है, तो उम्मीदवारी पर असर का सवाल उठेगा: कांग्रेस ने इसी आधार पर उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है। लेकिन केवल गलती सामने आना और कानूनन उम्मीदवारी रद्द होना दो अलग सवाल हैं। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि गलती का नेचर क्या है और चुनाव कानून के तहत उसका क्या परिणाम होगा।

नंदीग्राम से शुभेंदु ने ममता को हराया, लगातार दो बार भाजपा जीती

नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता बनर्जी ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं।

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई।

TMC प्रत्याशी ने नाम वापस लिया, ममता ने कांग्रेस को समर्थन दिया

नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के TMC गुट ने संचिता प्रधान डे को प्रत्याशी बनाया था। 18 सितंबर को उन्होंने CM शुभेंदु से मुलाकात के बाद चुनाव से नाम वापस ले लिया। उनके नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।

समर्थन के कुछ घंटे बाद कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार

ममता बनर्जी के समर्थन के ऐलान के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। मामला नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है।

बाद में प्रधान को अलग-अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 23 सितंबर को अदालत ने उन्हें एक अन्य 2007 के मामले में 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को होना है। कलकत्ता हाईकोर्ट 24 सितंबर को प्रधान की याचिका पर भी सुनवाई करेगा।

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नंदीग्राम कांग्रेस उम्मीदवार उपचुनाव लड़ सकेंगे, फिलहाल जेल में:कलकत्ता हाईकोर्ट बोला- जमानत मिले तो बंगाल सरकार चुनाव लड़ने दे; प्रधान पर 11 केस दर्ज

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा कि जमानत मिलने पर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने दिया जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने की। मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार हैं। प्रधान पर 11 केस दर्ज हैं। उन्हें 5 मामलों में गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल वे जेल में हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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भाजपा ने बुधवार को सभी राज्यों में अपने नए प्रभारियों और सह प्रभारियों का ऐलान किया। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से जारी लिस्ट के मुताबिक, स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड की जिम्मेदारी दी गई है। इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के प्रभारियों के भी नाम है। इन तीनों के नाम की 18 अगस्त को जारी की गई थी। उस लिस्ट में विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह प्रभारी बनाया गया था। सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया था। तब पार्टी ने कहा था कि बाकी राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति बाद में की जाएगी। प्रदेश प्रभारियों और सह-प्रभारियों की लिस्ट… यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…



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नई दिल्ली30 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर बुधवार को बंटा हुआ फैसला दिया है। दो जजों की बेंच को यह फैसला लेना था कि केस पांच जजों की बेंच को भेजा जाए या नहीं।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मामले को बड़ी बेंच को भेजने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वहीं जस्टिस एससी शर्मा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

दोनों जजों ने केस CJI सूर्यकांत के सामने रखने के निर्देश दिए। साथ ही CJI से अनुरोध किया कि वे कि केस की सुनवाई के लिए पांच जजों की स्थायी बेंच बनाने की संभावना पर विचार करें।

जस्टिस शर्मा बोले- संसद कानून बना चुकी

जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब पिछला फैसला आया तो वह एक वैक्यूम को भरने के लिए था। चयन को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। तब कोर्ट ने प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस की कमेटी की बात कही। अब स्थिति अलग है। संसद कानून बना चुकी है। मेरा फैसला है कि मामला चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए और वह 5 जजों की बेंच बनाएं।

याचिकाओं में नियुक्ति पैनल से CJI को हटाने पर सवाल

याचिकाओं में 2023 के उस कानून की वैधता को चुनौती दी गई है, जो CEC और इलेक्शन कमिश्नर्स की नियुक्ति से जुड़ा है। इस कानून में इलेक्शन कमिश्नर्स की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल से CJI को हटा दिया गया था।

इस कानून का बचाव करते हुए केंद्र ने दलीली दी- यह मान लेना गलत होगा कि चयन समिति में संख्या बल होने के कारण प्रधानमंत्री और मंत्री ‘बुरी मंशा’ से काम करेंगे या लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे।

प्रधानमंत्री पर भरोसा करने का सवाल नहीं: कोर्ट

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि अदालत प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं करती, ऐसा सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा- हम प्रधानमंत्री पर भरोसा क्यों नहीं करेंगे? निश्चित रूप से करेंगे।

असली मुद्दा यह है कि चुनाव आयुक्त स्वतंत्र व्यक्ति होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या चयन समिति में ऐसे लोग नहीं होने चाहिए, जिससे निष्पक्षता दिखाई भी दे।

चयन प्रक्रिया में CJI को बाहर रखने पर है विवाद

यह कानून दिसंबर 2023 में संसद से पारित हुआ था और 29 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ है, क्योंकि इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर रखा गया है। यह याचिकाएं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), कांग्रेस नेता जया ठाकुर, संजय नारायणराव मेश्राम, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा और वकील गोपाल सिंह ने दाखिल की थीं।

नए कानून में चयन समिति में कौन-कौन हैं?

2023 के कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री के नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।

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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सरकार की दलील:सुप्रीम कोर्ट से कहा- PM लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे, यह सोचना गलत

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब यह तय करेगी कि नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह जांच करेगा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को नियंत्रित और रेगुलेट करने का अधिकार है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि BCI की कानूनी जिम्मेदारी वकील के तौर पर लाइसेंस दिए जाने के बाद शुरू होती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सवाल उठाया कि BCI को कानूनी शिक्षा रेगुलेट करने वाली विशेषज्ञ संस्था कैसे माना जा सकता है। शिक्षा से जुड़े मामलों को लॉ स्कॉलर्स और शिक्षाविद ज्यादा बेहतर तरीके से देख सकते हैं। दरअसल, BCI ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए। कोर्ट ने BCI से 2 हफ्ते में जवाब मांगा सुप्रीम कोर्ट बीसीआई-पर्ल फर्स्ट ट्रस्ट के कामकाज और ट्रस्ट की ओर से लॉ कॉलेज खोलने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने नोटिस जारी कर BCI से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गिरीश मित्तल की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि BCI ने 2016 में एक प्रस्ताव पारित कर पुराने ट्रस्ट को खत्म कर उसकी रकम नए ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी थी। उन्होंने बताया कि 2020 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट फॉर प्रमोशन ऑफ एजुकेशन, लीगल एंड प्रोफेशनल रिफॉर्म्स एंड इम्प्रूवमेंट इन रिसर्च बनाया गया। भूषण ने कहा कि ट्रस्ट की डीड में 11 मैनेजिंग ट्रस्टी को मूल और स्थायी ट्रस्टी बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि BCI में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वे ट्रस्टी बने रह सकते थे। बाद में इस ट्रस्ट ने गोवा और आंध्र प्रदेश में एक-एक लॉ कॉलेज स्थापित किया। BCI चेयरपर्सन मनन के कार्यकाल पर भी सवाल उठे सुप्रीम कोर्ट इससे पहले BCI चेयरपर्सन मनन कुमार मिश्रा के पद को प्रो-टेम बता चुका है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि उन्हें कोई भी नीतिगत फैसला लेने से पहले भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से सलाह लेनी होगी। इससे पहले मिश्रा के लंबे कार्यकाल को चुनौती देते हुए उनकी पद से हटाने की मांग वाली याचिका भी दाखिल की गई थी। वकील योगमाया एम.जी. की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि मिश्रा पहली बार 2012 तक BCI चेयरमैन चुने गए थे। उन्होंने 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ा, लेकिन उसी साल नवंबर में दोबारा चेयरमैन बन गए और तब से पद पर बने हुए हैं। CJI की टिप्पणी से नाराज थे छात्र NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। ————– ये खबर भी पढ़ें… CJI को यूनिवर्सिटी इवेंट में चीफ गेस्ट बनाने का विरोध:हैदराबाद लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र बेरोजगारों को कॉकरोच कहने से नाराज; बोले- फैसले पर विचार करें हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी के करीब 450 स्टूडेंट्स ने 2026 दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया है। पूरी खबर पढ़ें…



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